केंद्र सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कुल ₹13,041 करोड़ के चार रेलवे लाइन प्रोजेक्ट्स और एक हाईवे परियोजना को मंजूरी दी है. इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेल और सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर करना, माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाना और प्रमुख रूट्स पर ट्रैफिक का दबाव कम करना है.
मंजूर की गई रेलवे परियोजनाएं ओडिशा और आंध्र प्रदेश में नई रेल लाइन और अतिरिक्त ट्रैक से जुड़ी हैं. वहीं, बिहार में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और सोनबरसा को जोड़ने वाले चार लेन हाईवे के निर्माण को भी मंजूरी दी गई है.
खड़गपुर-भद्रक चौथी लाइन को मंजूरी
कैबिनेट ने खड़गपुर-भद्रक (राणीताल) चौथी लाइन परियोजना को मंजूरी दी है. इस प्रोजेक्ट पर करीब ₹3,352 करोड़ खर्च होने का अनुमान है. इसके अलावा भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन परियोजना को भी हरी झंडी दी गई है, जिस पर लगभग ₹1,583 करोड़ का निवेश किया जाएगा.
खड़गपुर–भद्रक (राणीताल) चौथी लाइन – 173 किमी (पश्चिम बंगाल और ओडिशा)
भद्रक–हरिदासपुर चौथी लाइन – 75 किमी (ओडिशा)
गुम्मिडिपुंडी–गुडूर तीसरी और चौथी लाइन – 90 किमी (आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु)
कटक–पारादीप (बड़बांधा) तीसरी और चौथी लाइन – 72 किमी (ओडिशा)
गुम्मिडिपुंडी-गुडूर रेल प्रोजेक्ट
रेलवे से जुड़ी एक अन्य बड़ी परियोजना गुम्मिडिपुंडी-गुडूर तीसरी और चौथी लाइन की है. इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत ₹2,229 करोड़ है। वहीं, कटक-पारादीप तीसरी और चौथी लाइन परियोजना को भी मंजूरी दी गई है. इस पर करीब ₹2,286 करोड़ खर्च किए जाएंगे. इन अतिरिक्त रेल लाइनों से महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है. इससे यात्रियों और मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक सुचारू होगी और व्यस्त रेल मार्गों पर मौजूद भीड़भाड़ को कम करने में मदद मिलेगी.
बिहार में बनेगा चार लेन हाईवे
कैबिनेट ने बिहार के लिए भी एक अहम सड़क परियोजना को मंजूरी दी है. मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा चार लेन हाईवे का निर्माण करीब ₹3,591 करोड़ की अनुमानित लागत से किया जाएगा. इस हाईवे के बनने से बिहार के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के बीच सड़क संपर्क बेहतर होगा, साथ ही लोगों और सामान की आवाजाही तेज होने की उम्मीद है. परियोजना से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ-साथ व्यापार और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को भी फायदा मिल सकता है.
चार रेलवे परियोजनाओं से 410 किमी बढ़ेगा रेलवे नेटवर्क, 6,448 गांवों को मिलेगा फायदा
केंद्र सरकार की मंजूर की गई चार रेलवे परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के 8 जिलों को कवर करेंगी. इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में करीब 410 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी. मल्टी-ट्रैकिंग से जुड़ी इन परियोजनाओं के जरिए करीब 6,448 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है. इन गांवों की कुल आबादी लगभग 60 लाख है.
पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
रेलवे की क्षमता बढ़ने से देश के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी. इनमें कुलडीहा वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी, भितरकनिका नेशनल पार्क, मां भद्रकाली मंदिर, मां धामराई मंदिर, पंचलिंगेश्वर मंदिर, तलसारी-उदयपुर और चांदीपुर बीच, पुलिकट झील, नेलापट्टू बर्ड सेंक्चुरी और भगवान वीरराघव पेरुमल मंदिर समेत कई प्रमुख स्थल शामिल हैं. इसके अलावा गड़ा कुजंगा जगन्नाथ मंदिर, सरला मंदिर, धबलेश्वर मंदिर और बौद्ध स्थल ललितगिरी जैसे धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थानों तक भी रेल संपर्क मजबूत होगा.
कोयला से लेकर ऑटोमोबाइल तक माल ढुलाई को फायदा
ये रेल रूट कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, आयरन एंड स्टील, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और खाद्यान्न जैसी प्रमुख वस्तुओं की ढुलाई के लिए महत्वपूर्ण हैं. रेलवे के मुताबिक, इन परियोजनाओं से रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने के बाद अतिरिक्त 76 MTPA यानी 7.6 करोड़ टन प्रति वर्ष तक अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित हो सकती है.
लॉजिस्टिक्स लागत और प्रदूषण में आएगी कमी
रेलवे को सड़क परिवहन की तुलना में अधिक पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल परिवहन माध्यम माना जाता है. ऐसे में इन परियोजनाओं से देश की लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है. सरकार के अनुमान के मुताबिक, इन परियोजनाओं के कारण करीब 13 करोड़ लीटर तेल की बचत हो सकती है. वहीं, लगभग 65 करोड़ किलोग्राम CO₂ उत्सर्जन कम होने का अनुमान है.
रेलवे और सड़क कनेक्टिविटी पर सरकार का फोकस
इन चार रेलवे परियोजनाओं के जरिए पूर्वी और दक्षिणी भारत के महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर में क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है. वहीं, बिहार की हाईवे परियोजना राज्य में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है. सरकार लगातार रेलवे और हाईवे जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश बढ़ा रही है. इन परियोजनाओं से लॉजिस्टिक्स की दक्षता बढ़ाने, ट्रैफिक और रेल कॉरिडोर की भीड़ कम करने तथा आर्थिक गतिविधियों को गति देने में मदद मिलने की उम्मीद है.